किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर" की कविताओं के ब्लोग में आपका स्वागत है।

किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



गुरुवार, सितंबर 23, 2010

मिला मान का पान बहुत है

हल्की सी  मुस्कान बहुत है,
मुझ पर यह एहसान बहुत है
सुनता रहा  अदीबों से मैं,
मिला मान का पान बहुत है
अधिक भार का क्या करना है
जीने को समान बहुत है
बैर पड़ोसी से रखने को
चिनो पाकिस्तान बहुत है
भरने तेरा पेट चिदम्बर
जन की सस्ती जान बहुत है
सड़ने को सरकार बचाती
गोदानो मैं धान बहुत है
कविताई कुछ की किशोर ने
जितनी चली दुकान बहुत है

किशोर पारीक  "किशोर"

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

    जवाब देंहटाएं
  2. सड़ने को सरकार बचाती
    गोदानो मैं धान बहुत है
    बहुत सटीक व्यंग..बहुत खूब कहा है...

    जवाब देंहटाएं
  3. Vyangg aur aabhar ka mael acha hai..achi kavita

    जवाब देंहटाएं
  4. Vyangg aur aabhar ka gajab ka mael...achi kavita

    जवाब देंहटाएं