किशोर पारीक "किशोर"

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किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



मंगलवार, अगस्त 31, 2010

राष्ट्रीय कवि संगम

   गत दिनों जयपुर में आयोजीत राष्ट्रीय कवि संगम की  काव्य गोष्ठी में  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय इन्द्रेशजी ने  कहा की  कवि का निर्माण विश्व के किसी भी प्रशिक्षण संस्थान में नहीं होता क्योंकि कविता तो प्रकृति का वरदान है और अभ्यास करते करते व्यक्ति कवि बन जाता है।  कवि चन्द्रबरदाई की पंक्तियॉ “चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, तहाँ बैठो सुल्तान है, मत चुको चौहान” या बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित “वन्दे मातरम्” या सुभद्रा कुमारी चौहान की “खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी” के  अनेक उदाहरण   से राष्ट्र की  आजादी आन्दोलन में कवि और कविता के योगदान की चर्च करते हुए   कवि समाज को  राष्ट्रीय नव निर्माण में सामूहिक भूमिका निभाने का आव्हान किया !  राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय सयोजक श्री जगदीश मित्तलजी  के संयोजन  में गुलाबी नगर के कवियों, गीतकारों ने देर रात तक देशभक्ति एवं सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत  गीतों, ग़ज़लों कविताओं एवं दोहों की त्रिवेणी से जमकर रस बरसाया। कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि अलवर से पधारे वीररस के वरिष्ट्र   कवि बलवीर सिंह "करुण"   थे! विशिष्ट अतिथि काव्यलोक के अध्यक्ष नन्दलाल सचदेव एवं देश के ख्यातनाम हास्यव्यंग कवि बंकट बिहारी पागल थे।   
सर्व प्रथम जयपुर की शोभा चन्द्र   की सरस्वती वंदना के पश्च्यात  रास्ट्रीय कवि संगम के सयोजक जगदीश मित्तल ने सभी कलमकारों का स्वागत करते हुए कहा की   राष्ट्रीय कवि संगम देश भर में छुपी उन प्रतिभाओं को तलाशने और मंचीय प्रस्तुति के लिए उन्हें दक्ष करने का काम संगम बखूबी कर रहा है। संगम का स्पष्ट मानना है, कविता किसी भी विधा में लिखी जाए, यदि वह समाज को कोई सार्थक संदेश नहीं देती फिर उस कविता का होना ना होना बराबर है। संगम की गोष्ठियों में खास बात यह है कि इसमें  छंद, दोहा, गजल, हास्य जैसी काव्य विधाओं के उस्ताद भी शरीक होते हैं। ये लोग युवा कवियों को प्रशिक्षित और प्रेरित भी करते हैं। जयपुर के सदाकन्‍द पसंन्‍द शायर रजा शैदाई ने अपने देशभक्ति के जज्बे को कुछ इस तरह प्रस्तुत किया " लहराएगा तिरंगा ही अब आसमान पर भारत का नाम होगा सभी की जुबान पर, ले लेंगे जान उसकी या खेलेंगे जान पर, कोइ उठाये आँख तो हिंदुस्तान पर" कवि उमेश उत्साही ने चेतक एवं रांणा  प्रताप की यश गाथा में  मेवाड़ की वीरता का बखान किया तो अब्दुल गफ्फार इन दिनों चर्चा में रहे सोनिया—शोएब रिश्ते पर खुलकर बोले और कहा कि : फूल तुम्हारे घर—आंगन का निश्चित मानो नहीं खिलेगा। तुम जैसों से हम जैसों का ये सिंहासन नहीं हिलेगा।। सुनो सानिया मिर्जा! तुमको साफ—साफ बतलाता हूं, भारतीय शौहर के जैसा पाकिस्तान में नहीं मिलेगा। कवि अब्दुल अय्यूब गौरी ने केसर की क्यारी में तुमको ईद न मनाने देंगे, काश्मीर में तुमको कौमी ध्वज न फहराने देंगे पंक्तियों के साथ आतंकियों को ललकारा। संपत  सरल ने  हास्य व व्यंग्य रचना बातचीत  के साथ गुदगुदाने, मुस्काने व जोरदार ठहाके लगाने को मजबूर किया। जालोर से आये  शायर एवं पूर्व मंत्री जोगेश्‍वर गर्ग के अशआरों ने खूब दाद पायी 'करें है याद भी गर तो सताने के लिये कोई, हमारा नाम लिखता है मिटाने के लिये कोई, तेरी महफिल से उठ कर आ गया उम्‍मीद ये लेकर, पीछे आ रहा होगा, मनाने के लिये कोई। और व्‍यवस्‍थाओं पर चोट करते हुए जोगेश्‍वर ने इस अंदाज में कहा 'मौन शंकर मौन चंण्‍डी देश में, हो रहे हावी शिखंडी देश में, है टिका आकाश इनके शिश पर, सोचते हैं कुछ घंमडी देश में। कवि सोहन प्रकाश "सोहन" ने मानवीय संवेदना के गिरते परिवेश में भी प्यार की बात कही " संबंधो का अर्थ खो चुका, सवेदन अब शेष नहीं , वर्तमान में इस धरती पर, रक्तहीन परिवेश नहीं है, तू धरती के यमराजो को जीवन राग सुनाये जा, हृदाहिनता के इस युग में, गीत प्यार के गए जा "  वरिष्ठ हस्व्य कवि बंकट  बिहारी "पागल" मानव की विवशता को इन शब्दों में पिरोया" में जिन्दा नहीं  जिन्द हूँ  , वो भी अलादीन के चराग का, में जरिया भर हूँ बी बी बच्चों के पेट की आग का " काव्‍यालोक के अध्‍यक्ष नन्‍दलाल सचदेव ने युवाओं  की ओर मुखातिब होते हुए कहा " ऊँची उड़न जारी रख,आसमा चुने की तयारी रख, होसलें जिनके हो बुलंद, उनकी धडकनों से यारी रख" मालपुरा के युआ कवि शहनाज़ हिन्दुस्तानी ने शहीद भगतसिंह के बलिदान पर शब्द्पुष्प अर्पित किये  हुआ हुकम जब फांसी का तो, भगत सिंग यूँ  मुस्काया , बोला माँ अब गले लागले, मुद्दत में मोका आया , तखते फांसी कूच पे जब, क़दमों की आहत आती थी, तो दीवारे भी झूम झूम कर वन्दे मातरम गाती थी"  गोष्‍ठी का संचालन करते हुवे कवि किशोर पारीक 'किशोर' ने आपनी ओज भारी रचना " भ्रस्ट राष्ट्रों में गणना भारत की जब जब होती है, भगत सिंह आजाद पटेल की रूह बिलख कर रोटी है " सुनाकर ललकारा "   कवि वैघ भगवान सहाय  ने पाकिस्‍तान एवं अमेरिका की दोस्‍ती पर व्‍यंग्‍य गीत पढा ' पाला आज सपोला कल होगा बिकराल सपेरे विषधर मत पाल'सुनाकर सत्ता को नसीहत दी . गोष्ठी में जो चंदर प्रकाश चंदर, रमेश पंचाल, चित्तोड़ के नवीन " पार्थ", केसर लाल, योगेश्वर शर्मा, आत्माराम सिंघल, अशोक पराशार,प्रेम "पहड्पुरी"हास्य कवि शंकर "शिखर" युवा गीतकार कविन्द्र ठाकुर, कवयित्री विमला शर्मा वीनू , प्रवीण मस्त, मुकेश गुप्ता राज ने भी अपनी  अपनी रचनाओं से खूब दाद पाई ! अंत   में मालपुरा की विधायक रणवीर पहलवान ने आभार ज्ञापित किया !  

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